लच्छन धाम राम प्रिय सकल जगत

दोहा १९७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

लच्छन धाम राम प्रिय सकल जगत आधार। गुरु बसिष्ट तेहि राखा लछिमन नाम उदार॥ १९७ ॥

अर्थ

जो शुभ लक्षणों के धाम, श्रीरामजी के प्यारे और सारे जगत् के आधार हैं, गुरु वसिष्ठजी ने उनका “लक्ष्मण” ऐसा श्रेष्ठ नाम रखा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का दोहा १९७ है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला