धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी

चौपाई १, दोहा १९८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी॥ मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि रस तेहिं सुख माना॥ १ ॥

अर्थ

गुरुजी ने हृदय में विचार कर ये नाम रखे [और कहा--] हे राजन्‌! तुम्हारे चारों पुत्र वेद के तत्त्व हैं। जो मुनियों के धन, भक्तों के सर्वस्व और शिवजी के प्राण हैं, उन्होंने [इस समय तुम लोगों के प्रेमवश] बाललीला के रस में सुख माना है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला