लच्छन सब बिचारि उर राखे

चौपाई ३, दोहा १३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे॥ सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं॥ ३ ॥

अर्थ

सब लक्षणों को विचारकर मुनि ने अपने हृदय में रख लिया और राजा से कुछ अपनी ओर से बनाकर कह दिया। राजा से लड़की के सुलक्षण कहकर नारदजी चल दिये। पर उनके मन में यह चिन्ता थी कि--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग