कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय
कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय
दोहा १८० · बालकाण्ड
दोहा पाठ
कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय। एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय॥ १८० ॥
अर्थ
[इनके अतिरिक्त] कुमुख, अकम्पन, कुलिसरद, धूमकेतु और अतिकाय आदि ऐसे अनेक योद्धा थे, जो अकेले ही सारे जगत् को जीत सकते थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का दोहा १८० है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार