कुल समेत रिपु मूल बहाई

चौपाई ३, दोहा १७१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कुल समेत रिपु मूल बहाई। चौथें दिवस मिलब मैं आई॥ तापस नृपहि बहुत परितोषी। चला महाकपटी अतिरोषी॥ ३ ॥

अर्थ

कुलसहित शत्रु को जड़-मूल से उखाड़-बहाकर, [आज से] चौथे दिन मैं तुमसे आ मिलूँगा। [इस प्रकार] तपस्वी राजा को खूब दिलासा देकर वह महामायावी और अत्यन्त क्रोधी राक्षस चला।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा