अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा
अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा
चौपाई २, दोहा १७१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा। जौं तुम्ह कीन्ह मोर उपदेसा॥ परिहरि सोच रहहु तुम्ह सोई। बिनु औषध बिआधि बिधि खोई॥ २ ॥
अर्थ
हे राजन्! सुनो, जब तुमने मेरे कहने के अनुसार [इतना] काम कर लिया, तो अब मैंने शत्रु को काबू में कर ही लिया [समझो]। तुम अब चिन्ता त्याग सो रहो। विधाता ने बिना ही दवा के रोग दूर कर दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा