कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता
कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता
चौपाई ३, दोहा २२२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता॥ तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू॥ ३ ॥
अर्थ
कोई कहती है—यदि विधाता भले हैं और सुना जाता है कि वे सब को उचित फल देते हैं, तो जानकीजी को यही वर मिलेगा। हे सखी! इसमें सन्देह नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण