जौं बिधि बस अस बनै सँजोगू
जौं बिधि बस अस बनै सँजोगू
चौपाई ४, दोहा २२२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू॥ सखि हमरें आरति अति तातें। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें॥ ४ ॥
अर्थ
जो दैवयोग से ऐसा संयोग बन जाय, तो हम सब लोग कृतार्थ हो जायँ। हे सखी! हमारे तो इससे इतनी अधिक आतुरता हो रही है कि इसी नाते कभी ये यहाँ आएँगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण