करि पूजा भूपति अस भाषा

चौपाई २, दोहा १९७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

करि पूजा भूपति अस भाषा। धरिअ नाम जो मुनि गुनि राखा॥ इन्ह के नाम अनेक अनूपा। मैं नृप कहब स्वमति अनुरूपा॥ २ ॥

अर्थ

मुनि की पूजा करके राजाने कहा--हे मुनि! आपने मन में जो विचार रखे हों, वे नाम रखिये। [मुनि ने कहा--] हे राजन्‌! इनके अनेक अनुपम नाम हैं, फिर भी मैं अपनी बुद्धि के अनुसार कहूँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला