जो आनंद सिंधु सुखरासी
जो आनंद सिंधु सुखरासी
चौपाई ३, दोहा १९७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी॥ सो सुखधाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा॥ ३ ॥
अर्थ
ये जो आनन्द के समुद्र और सुख की राशि हैं, जिस (आनन्द-सिन्धु) के एक कण से तीनों लोक सुखी होते हैं, उन (आपके सबसे बड़े पुत्र) का नाम 'राम' है, जो सुख का भवन और सम्पूर्ण लोकों को शान्ति देने वाला है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला