करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी

चौपाई ३, दोहा २३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी॥ बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई॥ ३ ॥

अर्थ

श्रेष्ठ विज्ञानी मुनि विश्वामित्रजी भोजन करके कुछ प्राचीन कथाएँ कहने लगे। [इतने में] दिन बीत गया और गुरु की आज्ञा पाकर दोनों भाई सन्ध्या करने चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद