करहिं अहार साक फल कंदा
करहिं अहार साक फल कंदा
चौपाई १, दोहा १४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा॥ पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे॥ १ ॥
अर्थ
वे साग, फल और कन्द का आहार करते थे और सच्चिदानन्द ब्रह्म का स्मरण करते थे। फिर वे श्रीहरि के लिये तप करने लगे और मूल-फल को त्यागकर केवल जल के आधार पर रहने लगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान