द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित
द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित
दोहा १४३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग। बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग॥ १४३ ॥
अर्थ
और द्वादशाक्षर मन्त्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का प्रेम सहित जप करते थे। भगवान् वासुदेव के चरणकमलों में उन राजा-रानी का मन बहुत ही लग गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का दोहा १४३ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान