कपट नारि बर बेष बनाई
कपट नारि बर बेष बनाई
चौपाई ४, दोहा ३१८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई॥ करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानीं॥ ४ ॥
अर्थ
वे सब कपट से सुन्दर स्त्री का वेश बनाकर रनिवास में जा मिलीं और मनोहर वाणी से मंगलगान करने लगीं। सब कोई हर्ष के वश थे, अतः किसी ने उन्हें पहचाना नहीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत