कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि
कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि
चौपाई १, दोहा २३० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि॥ मानहुँ मदन दुंदुभी दीन्ही। मनसा बिस्व बिजय कहँ कीन्ही॥ १ ॥
अर्थ
कंकण, किंकिनि और नूपुर के शब्द सुनकर श्रीरामचन्द्रजी हृदय में विचारकर लक्ष्मण से कहते हैं--[यह ध्वनि ऐसी आ रही है] मानो कामदेव ने विश्व को जीतने का संकल्प करके डंके पर चोट मारी है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन