काम कला कछु मुनिहि न ब्यापी
काम कला कछु मुनिहि न ब्यापी
चौपाई ४, दोहा १२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
काम कला कछु मुनिहि न ब्यापी। निज भयँ डरेउ मनोभव पापी॥ सीम कि चाँपि सकइ कोउ तासू। बड़ रखवार रमापति जासू॥ ४ ॥
अर्थ
परन्तु कामदेव की कोई भी कला मुनि पर असर न कर सकी। तब तो पापी कामदेव अपने ही [नाश के] भय से डर गया। लक्ष्मीपति भगवान् जिसके बड़े रक्षक हों, भला, उसकी सीमा (मर्यादा) को कोई दबा सकता है ?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु