कहहु सखी अस को तनुधारी

चौपाई १, दोहा २२१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी॥ कोउ सप्रेम बोली मृदु बानी। जो मैं सुना सो सुनहु सयानी॥ १ ॥

अर्थ

हे सखी! [भला] कहो तो ऐसा कौन शरीरधारी होगा जो इस रूप को देखकर मोहित न हो जाय (अर्थात् यह रूप जड़-चेतन सबको मोहित करनेवाला है)। [तब] कोई दूसरी सखी प्रेम सहित कोमल वाणी से बोली—हे सयानी! मैंने जो सुना है उसे सुनो—।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण