कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक

चौपाई १, दोहा २१६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुलपालक॥ ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा॥ १ ॥

अर्थ

हे नाथ! कहिये, ये दोनों सुन्दर बालक मुनिकुल के तिलक हैं या नृपकुल के पालक? ब्रह्म जो निगमों ने ‘नेति’ कहकर गाया है, कहीं वही दोनों रूप धरकर तो नहीं आया है?

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २१६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।

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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध