कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना

चौपाई ४, दोहा २८६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना। रहा बिबाहु चाप आधीना॥ टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू। सुर नर नाग बिदित सब काहू॥ ४ ॥

अर्थ

मुनि ने कहा--हे चतुर नरेश! सुनो, यों तो विवाह धनुष के अधीन था; धनुष के टूटते ही विवाह हो गया। देवता, मनुष्य और नाग, सब किसी को यह मालूम है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद