जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर

दोहा ११ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग। पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग॥ ११ ॥

अर्थ

उन कवितारूपी मुक्तामणियों को युक्ति से बेधकर फिर रामचरित्ररूपी सुन्दर तागे में पिरोकर सज्जन लोग अपने निर्मल हृदय में धारण करते हैं, जिससे अत्यन्त अनुरागरूपी शोभा होती है (वे आत्यन्तिक प्रेम को प्राप्त होते हैं)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का दोहा ११ है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।

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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता