जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें
जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें
चौपाई २, दोहा ११६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें। जलु हिम उपल बिलग नहिं जैसें॥ जासु नाम भ्रम तिमिर पतंगा। तेहि किमि कहिअ बिमोह प्रसंगा॥ २ ॥
अर्थ
जो निर्गुण है, वही सगुण कैसे है? जैसे जल और हिम में भेद नहीं होता। जिसका नाम भ्रमरूपी अन्धकार के लिए सूर्य है, उसके लिए मोह का प्रसंग कैसे कहा जा सकता है?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद