जेहि बिधि होइ धर्म निर्मूला
जेहि बिधि होइ धर्म निर्मूला
चौपाई ३, दोहा १८३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जेहि बिधि होइ धर्म निर्मूला। सो सब करहिं बेद प्रतिकूला॥ जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं। नगर गाउँ पुर आगि लगावहिं॥ ३ ॥
अर्थ
जिस प्रकार धर्म की जड़ कटे, वे वही सब वेदविरुद्ध काम करते थे। जिस-जिस स्थान में वे गौ और ब्राह्मणों को पाते थे, उसी नगर, गाँव और पुर में आग लगा देते थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार