जौं एहिं खल नित करब अहारू
जौं एहिं खल नित करब अहारू
चौपाई ४, दोहा १७७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू॥ सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास षट केरी॥ ४ ॥
अर्थ
जो यह दुष्ट नित्य आहार करेगा, तो सारा संसार ही उजाड़ हो जाएगा। [ऐसा विचारकर] ब्रह्माजी ने सरस्वती को प्रेरणा करके उसकी बुद्धि फेर दी। [जिससे] उसने छः महीने की नींद माँगी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार