जौं दिन प्रति अहार कर सोई

चौपाई ३, दोहा १८० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जौं दिन प्रति अहार कर सोई। बिस्व बेगि सब चौपट होई॥ समर धीर नहिं जाइ बखाना। तेहि सम अमित बीर बलवाना॥ ३ ॥

अर्थ

यदि वह प्रतिदिन भोजन करता, तब तो सम्पूर्ण विश्व शीघ्र ही चौपट हो जाता। रणधीर ऐसा था कि जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। उसके समान असंख्य बलवान् वीर थे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार