जौं बालक कह तोतरि बाता
जौं बालक कह तोतरि बाता
चौपाई ५, दोहा ८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं बालक कह तोतरि बाता। सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता॥ हँसिहहिं कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी॥ ५ ॥
अर्थ
जैसे बालक जब तोतले वचन बोलता है तो उसके माता-पिता उन्हें प्रसन्न मन से सुनते हैं। किन्तु क्रूर, कुटिल और बुरे विचार वाले लोग जो दूसरों के दोषों को ही भूषण रूप से धारण किए रहते हैं (अर्थात् जिन्हें पराये दोष ही प्यारे लगते हैं), हँसेंगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जीवों में रामरूप वन्दना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समस्त चौरासी लाख योनियों में सीताराममय जगत् देखकर कवि की सर्वजीव वन्दना का वर्णन है।
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जीवों में रामरूप वन्दना