जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़

दोहा ६९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ बिबेक अभिमान। परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान॥ ६९ ॥

अर्थ

यदि मूर्ख मनुष्य विवेक के अभिमान से इस प्रकार होड़ करते हैं तो वे कल्प भर के लिए नरक में पड़ते हैं। भला, कहीं जीव भी ईश्वर के समान हो सकता है?

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का दोहा ६९ है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या