जासु त्रास डर कहुँ डर होई

चौपाई ४, दोहा २२५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जासु त्रास डर कहुँ डर होई। भजन प्रभाउ देखावत सोई॥ कहि बातें मृदु मधुर सुहाईं। किए बिदा बालक बरिआईं॥ ४ ॥

अर्थ

जिनके भय से डर को भी डर लगता है, वही प्रभु भजन का प्रभाव [जिसके कारण ऐसे महान् प्रभु भी भय का नाट्य करते हैं] दिखला रहे हैं। उन्होंने कोमल, मधुर और सुन्दर बातें कहकर बालकों को जबरदस्ती विदा किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण