जड़ चेतन जग जीव जत सकल
जड़ चेतन जग जीव जत सकल
दोहा ७ (ग) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि। बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि॥ ७ (ग) ॥
अर्थ
जगत् में जितने जड़ और चेतन जीव हैं, सबको राममय जानकर मैं उन सबके चरणकमलों की सदा दोनों हाथ जोड़कर वन्दना करता हूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जीवों में रामरूप वन्दना” प्रकरण का दोहा ७ (ग) है। इस प्रकरण में समस्त चौरासी लाख योनियों में सीताराममय जगत् देखकर कवि की सर्वजीव वन्दना का वर्णन है।
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जीवों में रामरूप वन्दना