देव दनुज नर नाग खग प्रेत
देव दनुज नर नाग खग प्रेत
दोहा ७ (घ) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब। बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब॥ ७ (घ) ॥
अर्थ
देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग, पक्षी, प्रेत, पितर, गन्धर्व, किन्नर और निशाचर सबको मैं प्रणाम करता हूँ। अब सब मुझ पर कृपा कीजिए।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जीवों में रामरूप वन्दना” प्रकरण का दोहा ७ (घ) है। इस प्रकरण में समस्त चौरासी लाख योनियों में सीताराममय जगत् देखकर कवि की सर्वजीव वन्दना का वर्णन है।
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जीवों में रामरूप वन्दना