जपहिं नामु जन आरत भारी

चौपाई ३, दोहा २२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी॥ राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा॥ ३ ॥

अर्थ

[संकट से घबराये हुए] आर्त भक्त नाम जप करते हैं तो उनके बड़े भारी बुरे-बुरे संकट मिट जाते हैं और वे सुखी हो जाते हैं। जगत् में चार प्रकार के (१-अर्थार्थी—धनादि की चाह से भजनेवाले, २-आर्त—संकट की निवृत्ति के लिये भजनेवाले, ३-जिज्ञासु—भगवान् को जानने की इच्छा से भजनेवाले, ४-ज्ञानी—भगवान् को तत्त्व से जानकर स्वाभाविक ही प्रेम से भजनेवाले) रामभक्त हैं और चारों ही पुण्यात्मा, पापरहित और उदार हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा