चहू चतुर कहुँ नाम अधारा
चहू चतुर कहुँ नाम अधारा
चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चहू चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा॥ चहुँ जुग चहुँ श्रुति नाम प्रभाऊ। कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ॥ ४ ॥
अर्थ
चारों ही चतुर भक्तों को नाम का ही आधार है; इनमें ज्ञानी भक्त प्रभु को विशेषरूप से प्रिय है। यों तो चारों युगों में और चारों ही वेदों में नाम का प्रभाव है, परन्तु कलियुग में विशेषरूप से है। इसमें तो [नाम को छोड़कर] दूसरा कोई उपाय ही नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।
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रामनाम की महिमा