जानी सियँ बरात पुर आई

चौपाई ४, दोहा ३०६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जानी सियँ बरात पुर आई। कछु निज महिमा प्रगटि जनाई॥ हृदयँ सुमिरि सब सिद्धि बोलाईं। भूप पहुनई करन पठाईं॥ ४ ॥

अर्थ

सीताजी ने बारात जनकपुर में आयी जानकर अपनी कुछ महिमा प्रकट करके दिखलायी। हृदय में स्मरण कर सब सिद्धियों को बुलाया और उन्हें राजा दशरथजी की मेहमानी करने के लिये भेजा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत