बसन बिचित्र पाँवड़े परहीं

चौपाई ३, दोहा ३०६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बसन बिचित्र पाँवड़े परहीं। देखि धनदु धन मदु परिहरहीं॥ अति सुंदर दीन्हेउ जनवासा। जहँ सब कहुँ सब भाँति सुपासा॥ ३ ॥

अर्थ

विलक्षण वस्त्रों के पाँवड़े पड़ रहे हैं, जिन्हें देखकर कुबेर भी अपने धन का अभिमान छोड़ देते हैं। बड़ा सुन्दर जनवासा दिया गया, जहाँ सबको सब प्रकार का सुभीता था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत