जानि कृपाकर किंकर मोहू
जानि कृपाकर किंकर मोहू
चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू॥ निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाहीं॥ २ ॥
अर्थ
मुझको अपना दास जानकर, कृपाकर, आप सब लोग मिलकर छल छोड़कर कृपा कीजिए। मुझे अपने बुद्धि-बल का भरोसा नहीं है, इसलिए मैं सबसे विनती करता हूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जीवों में रामरूप वन्दना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समस्त चौरासी लाख योनियों में सीताराममय जगत् देखकर कवि की सर्वजीव वन्दना का वर्णन है।
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जीवों में रामरूप वन्दना