आकर चारि लाख चौरासी

चौपाई १, दोहा ८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी॥ सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥ १ ॥

अर्थ

चौरासी लाख योनियों में चार प्रकार के जीव जल, पृथ्वी और आकाश में रहते हैं, उन सबसे भरे हुए इस सारे जगत् को श्रीसीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जीवों में रामरूप वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समस्त चौरासी लाख योनियों में सीताराममय जगत् देखकर कवि की सर्वजीव वन्दना का वर्णन है।

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जीवों में रामरूप वन्दना