जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु

सोरठा २३६ · बालकाण्ड

सोरठा पाठ

जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥ २३६ ॥

अर्थ

गौरीजी को अनुकूल जानकर सीताजी के हृदय को जो हर्ष हुआ वह कहा नहीं जा सकता। सुन्दर मंगल मूल बायें अंग फड़कने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का सोरठा २३६ है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद