हृदयँ सराहत सीय लोनाई

चौपाई १, दोहा २३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई॥ राम कहा सबु कौसिक पाहीं। सरल सुभाउ छुअत छल नाहीं॥ १ ॥

अर्थ

हृदय में सीताजी के सौन्दर्य की सराहना करते हुए दोनों भाई गुरुजी के पास गये। श्रीरामचन्द्रजी ने विश्वामित्रजी से सब कुछ कह दिया। क्योंकि उनका सरल स्वभाव है, छल तो उसे छूता भी नहीं है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद