जनम रंक जनु पारस पावा
जनम रंक जनु पारस पावा
चौपाई ४, दोहा ३५० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा॥ मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई॥ ४ ॥
अर्थ
जन्म का दरिद्री मानो पारस पा गया। अंधे को सुन्दर नेत्रों का लाभ हुआ। गूँगे के मुख में मानो सरस्वती आ विराजीं और शूरवीर ने मानो युद्ध में विजय पा ली।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना