जनक सनेहु सीलु करतूती

चौपाई १, दोहा ३३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती॥ दिन उठि बिदा अवधपति मागा। राखहिं जनकु सहित अनुरागा॥ १ ॥

अर्थ

राजा दशरथजी जनकजी के स्नेह, शील, करनी और ऐश्वर्य की सब प्रकार से सराहना करते हैं। प्रतिदिन [सबेरे] उठकर अयोध्यानरेश विदा माँगते हैं। पर जनकजी उन्हें प्रेम से रख लेते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह