जनक बचन सुनि सब नर नारी

चौपाई ४, दोहा २५२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी॥ माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें॥ ४ ॥

अर्थ

जनक के वचन सुनकर सभी नर-नारी जानकीजी को देखकर दुःखी हुए। लक्ष्मणजी तमतमा उठे, उनकी भौंहें टेढ़ी हो गईं, ओठ फड़कने लगे और नेत्र क्रोध से लाल हो गए।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।

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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध