जम गन मुहँ मसि जग जमुना
जम गन मुहँ मसि जग जमुना
चौपाई ६, दोहा ३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी॥ रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी। तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी॥ ६ ॥
अर्थ
यमदूतों के मुख पर कालिख लगाने के लिये यह जगत् में यमुना जी के समान है और जीवों को मुक्ति देने के लिये मानो काशी ही है। यह श्रीरामजी को पवित्र तुलसी के समान प्रिय है और तुलसीदास के लिये हुलसी (तुलसीदासजी की माता) के समान हृदय से हित करनेवाली है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा