जाइ देखि आवहु नगरु सुख निधान
जाइ देखि आवहु नगरु सुख निधान
दोहा २१८ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जाइ देखि आवहु नगरु सुख निधान दोउ भाइ। करहु सुफल सब के नयन सुंदर बदन देखाइ॥ २१८ ॥
अर्थ
सुख के निधान दोनों भाई जाकर नगर देख आओ। अपने सुन्दर मुख दिखलाकर सब के नेत्रों को सफल करो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का दोहा २१८ है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।
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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध