इहाँ संभु अस मन अनुमाना
इहाँ संभु अस मन अनुमाना
चौपाई ३, दोहा ५२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना॥ मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधि बिपरीत भलाई नाहीं॥ ३ ॥
अर्थ
इधर शिवजी ने मन में ऐसा अनुमान किया कि दक्षसुता का कल्याण नहीं है। मेरे कहने से भी सन्देह दूर नहीं होते, [मालूम होता है] विधि विपरीत है, भलाई नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।
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सती का भ्रम और खेद