इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा
इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा
चौपाई ४, दोहा २०१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा॥ देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी॥ ४ ॥
अर्थ
यहाँ और वहाँ मैंने दो बालक देखे। यह मेरी बुद्धि का भ्रम है या कोई और विशेष बात? प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ने माता को घबरायी हुई देखकर मधुर मुसकान से हँस दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला