होइ न बिषय बिराग भवन बसत

सोरठा १४२ · बालकाण्ड

सोरठा पाठ

होइ न बिषय बिराग भवन बसत भा चौथपन। हृदयँ बहुत दुख लाग जनम गयउ हरिभगति बिनु॥ १४२ ॥

अर्थ

घर में रहते बुढ़ापा आ गया, परन्तु विषयों से वैराग्य नहीं होता; [इस बात को सोचकर] उनके मन में बड़ा दुःख हुआ कि श्रीहरि की भक्ति बिना जन्म यों ही चला गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का सोरठा १४२ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान