होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी

दोहा १३५ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ। हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ॥ १३५ ॥

अर्थ

तुम दोनों कपटी और पापी जाकर राक्षस हो जाओ। तुमने हमारी हँसी की, उसका फल चखो। अब फिर किसी मुनि की हँसी करना।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १३५ है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
नारद का शाप और मोहभंग