हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता

चौपाई ३, दोहा २४२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता॥ रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया॥ ३ ॥

अर्थ

हरिभक्तों ने दोनों भाइयों को सब सुखों के देनेवाले इष्टदेव के समान देखा। सीताजी जिस भाव से श्रीरामचन्द्रजी को देख रही हैं, वह स्नेह और सुख तो कहने में ही नहीं आता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।

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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश