गावहिं गीत मनोहर नाना
गावहिं गीत मनोहर नाना
चौपाई ३, दोहा ३०१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना॥ तब सुमंत्र दुइ स्यंदन साजी। जोते रबि हय निंदक बाजी॥ ३ ॥
अर्थ
और नाना प्रकार के मनोहर गीत गा रही हैं। उनके अत्यन्त आनन्द का बखान नहीं हो सकता। तब सुमन्त्रजी ने दो रथ सजाकर उनमें सूर्य के घोड़ों को भी मात करनेवाले घोड़े जोते।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान