दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने

चौपाई ४, दोहा ३०१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने॥ राज समाजु एक रथ साजा। दूसर तेज पुंज अति भ्राजा॥ ४ ॥

अर्थ

दोनों सुन्दर रथ वे राजा दशरथ के पास ले आये, जिनकी सुन्दरता का वर्णन सरस्वती से भी नहीं हो सकता। एक रथ पर राजसी सामान सजाया गया। और दूसरा जो तेज का पुंज और अत्यन्त ही शोभायमान था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान