एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि
एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि
दोहा १६५ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि। मिलब हमार भुलाब निज कहहु त हमहि न खोरि॥ १६५ ॥
अर्थ
‘एवमस्तु’ (ऐसा ही हो) कहकर वह कुटिल कपटी मुनि फिर बोला—[किन्तु] तुम मेरे मिलने तथा अपने राह भूल जाने की बात किसी से [कहना नहीं; यदि] कह दोगे, तो हमारा दोष नहीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १६५ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा